तुम्हारी दुनिया किसी चलचित्र के सीन सी मालूम पड़ती है

तुम्हारी दुनिया किसी चलचित्र के
सीन सी मालूम पड़ती है
हमारी दुनिया तो छल-कपट ,
भाग-दौड़  से भरी है
तुम्हारी दुनिया शान्त सी ,
खुशहाल , जीवंत प्रतीत होती है
हमारी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ,
कुछ किलोमीटर के  दायरे में
ज़िन्दगी-मौत का फासला तय कर लेते हैं
तुम्हारी दुनिया में फासला फासला सा मालूम ही नहीं पड़ता
दूरियां पलक झपकते तय होती है
इस ज़िन्दगी मौत के फासले नहीं बल्कि कई और
अनछुए से पहलू  हैं
हमारी ज़िन्दगी सीमित सी ,
एक कूप-मंडूक  सी मालूम पड़ती है
तो तुम्हारी क्षितिज  विहीन आसमान में
उड़ते हुए एक परिंदे जैसा
हमारी सीमाएं कुएं की दीवारें तय करती है
तो तुम सीमाविहीन आसमान में हर रोज ,
कुछ  नयी उंचाईओं को नापते हो
हमारी दुनिया कुछ जानी -पहचानी और
प्रचलित मालूम पड़ती है
वहीँ तुम्हारी दुनिया किसी चलचित्र के
सीन सी मालूम पड़ती है।

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